आज हम बात करने वाले हैं मल्टी-एसेट फंड्स की, जो इन दिनों निवेश की दुनिया में काफी चर्चा में हैं। अगर आप भी यह जानना चाहते हैं कि मल्टी-एसेट फंड क्या है? और यह आपके निवेश पोर्टफोलियो के लिए कितना सही है, तो यह लेख आपके लिए ही है। चलिए, आसान भाषा में समझते हैं।
मल्टी-एसेट फंड क्या है? एक नज़र में
सीधे शब्दों में कहें तो, मल्टी-एसेट फंड – Multi-Asset Fund वह म्यूचुअल फंड है जो आपके पैसे को सिर्फ एक जगह नहीं, बल्कि तीन अलग-अलग एसेट क्लासेस में निवेश करता है – इक्विटी, गोल्ड और डेट फंड। यानी आप एक ही फंड के जरिए शेयर बाजार, सोना और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में पैसा लगा सकते हैं। इसका मुख्य उद्देश्य पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन क्या है? यह समझाना और उसे हकीकत में बदलना है। यह फंड बाजार के उतार-चढ़ाव के जोखिम को कम करने का दावा करते हैं।
मल्टी-एसेट फंड के फायदे और नुकसान
हर सिक्के के दो पहलू होते हैं, ठीक वैसे ही मल्टी-एसेट फंड्स के भी अपने फायदे और नुकसान हैं।
फायदे:
- ऑटोमैटिक डाइवर्सिफिकेशन: आपको अलग-अलग फंड्स में निवेश करने की जरूरत नहीं, एक ही फंड सब कुछ संभालता है।
- रिस्क मैनेजमेंट: एक एसेट क्लास में मंदी होने पर दूसरी संतुलन बनाए रख सकती है।
- पेशेवर मैनेजमेंट: फंड मैनेजर का रोल यहाँ अहम हो जाता है, वे बाजार हालात देखते हुए एसेट एलोकेशन समय-समय पर बदलते रहते हैं।
नुकसान:
- सीमित डाइवर्सिफिकेशन: ये फंड पूरी तरह से डाइवर्सिफाइड नहीं हो सकते, कई बार फंड मैनेजर एक ही एसेट क्लास पर फोकस कर सकते हैं।
- कम रिटर्न की संभावना: चूंकि पूरा पैसा इक्विटी में नहीं लगता, इसलिए रिटर्न शुद्ध इक्विटी फंड्स जितना ऊंचा नहीं हो सकता।
- टैक्स कॉम्प्लेक्सिटी: मल्टी-एसेट फंड टैक्सेशन (Taxation) थोड़ा जटिल हो सकता है, जिस पर हम आगे चर्चा करेंगे।
क्या मल्टी-एसेट फंड सुरक्षित हैं?
यह सवाल हर निवेशक के मन में आता है। जवाब है – यह निर्भर करता है आपकी परिभाषा “सुरक्षा” की क्या है। ये फंड शुद्ध इक्विटी फंड्स से कम जोखिम भरे होते हैं, क्योंकि इनमें रिस्क अलग-अलग एसेट क्लासेस में बंटा होता है। हालांकि, ये पूरी तरह रिस्क-फ्री नहीं हैं। बाजार की मार सभी पर पड़ती है, लेकिन यहाँ नुकसान की गुंजाइश कम हो जाती है। इसलिए, क्या मल्टी-एसेट फंड सुरक्षित हैं का जवाब है – हाँ, लेकिन सीमित रिस्क के साथ।
मल्टी-एसेट फंड में निवेश कैसे करें?
मल्टी-एसेट फंड में निवेश कैसे करें यह जानना बेहद आसान है। आप नीचे दिए गए तरीकों से निवेश शुरू कर सकते हैं:
- किसी भी बड़े म्यूचुअल फंड हाउस की ऑफिशियल वेबसाइट या मोबाइल ऐप के जरिए।
- रजिस्टर्ड इन्वेस्टमेंट एडवाइजर या डिस्ट्रिब्यूटर की सहायता से।
- SIP (सिस्टमेटिक इन्वेस्टमेंट प्लान) के जरिए छोटी-छोटी रकम जमा करके।
लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेस्ट फंड?
अगर आपका नजरिया लंबी अवधि का है, तो मल्टी-एसेट फंड अच्छा विकल्प हो सकते हैं। बच्चों की शिक्षा, घर खरीदना या रिटायरमेंट जैसे लॉन्ग टर्म निवेश के लिए बेस्ट फंड की तलाश में ये फंड अपनी बेहतर एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी के कारण उपयुक्त रहते हैं। समय के साथ ये फंड मार्केट के झटके सहने और स्थिर रिटर्न देने की क्षमता रखते हैं।
फंड मैनेजर का रोल: एक महत्वपूर्ण पहलू
मल्टी-एसेट फंड्स एक्टिवली मैनेज्ड होते हैं, यानी इनमें फंड मैनेजर का रोल सबसे अहम हो जाता है। फंड मैनेजर ही तय करता है कि कब इक्विटी में ज्यादा पैसा लगाना है, कब गोल्ड या डेट में शिफ्ट होना है। उसका अनुभव, बाजार का विश्लेषण और सही फैसले आपके निवेश का भाग्य तय करते हैं। इसलिए निवेश से पहले फंड मैनेजर के ट्रैक रिकॉर्ड को अवश्य चेक करें।
मल्टी-एसेट फंड टैक्सेशन (Taxation)
मल्टी-एसेट फंड टैक्सेशन (Taxation) को समझना जरूरी है क्योंकि यह सीधे आपके रिटर्न को प्रभावित करता है। टैक्स का नियम इस बात पर निर्भर करता है कि फंड में इक्विटी की हिस्सेदारी कितनी है:
- अगर फंड का 65% या उससे अधिक हिस्सा इक्विटी में निवेशित है, तो इसे इक्विटी फंड माना जाएगा। ऐसे में 12 महीने से कम समय के लिए रखने पर एसटीसीजी (STCG) 15% लगेगा, और 12 महीने से अधिक पर एलटीसीजी (LTCG) 10% लगेगा (1 लाख रुपये सालाना छूट के बाद)।
- अगर इक्विटी एक्सपोजर 65% से कम है, तो इसे नॉन-इक्विटी फंड माना जाएगा। ऐसे में 36 महीने से कम समय के लिए रखने पर गेन आपकी इनकम स्लैब के अनुसार टैक्सेबल होगा, और 36 महीने से अधिक पर 20% टैक्स इंडेक्सेशन बेनिफिट के साथ लगेगा।
2025 के कुछ बेस्ट मल्टी-एसेट फंड्स?
बेस्ट मल्टी-एसेट फंड 2025 की लिस्ट बनाते समय कई बातों का ध्यान रखना पड़ता है, जैसे फंड का पिछला प्रदर्शन, फंड हाउस की साख और एसेट एलोकेशन स्ट्रैटेजी। हालाँकि, यहाँ कुछ लोकप्रिय फंड्स के नाम हैं जिन पर निवेशक नजर रख सकते हैं (निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से सलाह अवश्य लें):
- ICICI Prudential Multi-Asset Fund
- HDFC Multi-Asset Fund
- SBI Multi-Asset Allocation Fund
- Nippon India Multi-Asset Fund
याद रखें, “बेस्ट” की परिभाषा हर निवेशक के लिए अलग हो सकती है, यह आपकी जोखिम उठाने की क्षमता और वित्तीय लक्ष्यों पर निर्भर करता है।
निष्कर्ष: क्या यह आपके लिए सही है?
मल्टी-एसेट फंड्स उन निवेशकों के लिए एक बेहतरीन विकल्प हैं जो इक्विटी, गोल्ड और डेट फंड में अलग-अलग निवेश करने की झंझट से बचना चाहते हैं और एक संतुलित पोर्टफोलियो चाहते हैं। ये पोर्टफोलियो डाइवर्सिफिकेशन का एक सुविधाजनक तरीका प्रदान करते हैं। हालांकि, इनमें निवेश करने से पहले फंड का डॉक्युमेंट पढ़ना, एसेट एलोकेशन समझना और फंड मैनेजर के अनुभव को जांचना न भूलें।
आखिर में, निवेश का फैसला हमेशा अपनी वित्तीय स्थिति, लक्ष्य और जोखिम सहनशीलता के आधार पर ही लें। सुरक्षित और लाभदायक निवेश की शुभकामनाएं
डिस्क्लेमर:
यह लेख केवल सामान्य जानकारी प्रदान करने के उद्देश्य से लिखा गया है। हम कोई वित्तीय सलाहकार नहीं हैं। पर्सनल लोन या किसी भी वित्तीय निर्णय से पहले कृपया अपने वित्तीय सलाहकार से व्यक्तिगत सलाह जरूर लें। किसी भी लोन आवेदन का निर्णय आपकी व्यक्तिगत स्थिति और बैंक के नियमों पर निर्भर करता है। हम किसी भी वित्तीय नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे।

